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गजल कहता हूँ धड़कनोमे रहती है साँसें तेरी ,मुकुल द्वे। चातक

गजल   कहता  हूँ   धड़कनोमे  रहती  है  साँसें   तेरी  रोज   घिरी   रहती   है  तन्हाईमे  महकी  बातें  तेरी  धूप  रुखसत होते ही रुखस…

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