GAZAL KARLE

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તરસથી વધુ જે પીએ આ જન્મમાં ,બીજા જન્મમાં એ જ 'ચાતક' બને છે

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आवाज सुनो

       
कौन जाके समझाये ख़ुदपरस्त दुनियाको
क्या सनम परस्ती है ,कया खुदापरस्ती है  ---------- रवीश सिदिकी

हज़ार   बार   मुझे   देख  कर  नहीं  देखा
ये शोखिए निगहे इल्तेफात कम तो नहीं   -------------रवीश सिदिकी

दुश्मनोकी गुफ्तगु क्या सुनूं के अब मुझे ,
दोस्तोंकी    बातका  ऐतबार   तक  नहीं     ------- अखतर अंसारी

नकशे उल्फत के मिटकर निशां रह गये ,
हम  कहां  आ   गये  तुम  कहां  रेह  गये ?--------रशि पटियालवी

तमाम   उम्र   कटी   आसमां  के  साये   में ,
किसी भी शाख पे हम आशियां बना न सके --------कमलाप्रसाद

जो  काम  आये  किसीके  तो  जिंदगी   दे  दी ,
सितम तो ये हय के अपने भी काम आ न सके -------कमलाप्रसाद

कुच्छ इस तरह उलझे है गेसूए दौरां ,
खुदा   ही   संवारे  तो  इनको  संवारे ------- महेशर नकवी

न कर अपने तलवों के छालो का कुछ गम ,
चलाचल  मुसाफिर  तू  मन्ज़िल  की  धुनमें ,
रहे      ज़िंदगीमें      तवक्कु     गुन्हा     हय ,
न   माना   तो   तुजह   पर  से गुज़रेंगे  राही -------जिगर अहमदाबादी








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