इतने खोकर मुझमें रहा न करो,मुकुल दवे 'चातक '


इतने  खोकर  मुझमें  रहा करो
बेरूखीमें   जुदा   किया      करो

ख्वाब   हैं  स्वप्नं  बुनने  के  लिए
सोचके  यूँ   मिटा  दिया     करो

अपने हुस्ने बयाँका  लिहाज  करो
यार  सबको  बना  लिया     करो

इतने ख़ामोशी से यूँ तबाह करो
यह जख्म से गिला  किया करो

तेरे  रुखसे  हर्फ़की  बेरुखी  गई
गमकी  हिकायतें  किया     करो

हर्फ़ -शब्द // हिकायतें-कहानी
मुकुल दवे  'चातक '

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